कलियुग में संघ शक्ति ही प्रधान है

संघे शक्ति कलियुगे !
अर्थात कलियुग में संघ शक्ति ही प्रधान है।
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ब्राह्मण को भूसुर, पुरोहित,पंडित, ब्रह्मर्षि आदि नामोँ से जाना जाता है
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इस पृथ्वी पर सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य हैं और मनुष्यों में भी सर्वश्रेष्ठ अवस्था ब्राह्मण की है।
प्राचीन काल में बड़े बड़े राजा ब्राह्मणों के सामने मस्तक नवाते थे, ब्राह्मण के श्राप के सम्मुख भयभीत हो जाते थे। ब्राह्मण के मुख से निकला हुआ शब्द अमोघ होता था उनके द्वारा दिया हुआ श्राप या वरदान कभी निष्फल नहीं होता था।
पर आज क्या कारण है कि ब्राह्मण समाज आज अपने ही देश में अपने गौरव को खोकर पद दलित हो रहा है। क्या कारण है कि भारत की सभ्यता संस्कृति में अपना अनुपम योगदान देने वाला अधिकांश ब्राह्मण समाज गरीबी, अशिक्षा , बेरोजगारी और अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंवाकर असहाय और उपेक्षित होता चला जा रहा है।
केंद्र और राज्य सरकारें इस समाज के प्रति पूर्णतया उपेक्षा का भाव रखती हैं।
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इस परिस्थिति के दो महत्वपूर्ण कारण हैं:–
(1)हमारा राजनैतिक हितों की पूर्ति के लिए संगठित न होना।
(2) जिन गुणों के आधार पर ब्राह्मण पूज्य थे, उन गुणों का सर्वथा त्याग करना। आइये इस पर एक एक कर विचार करें।
(1) राजनैतिक रूप से असंगठित होना
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** यह सर्वमान्य तथ्य है कि स्वतंत्रता संग्राम में ब्राह्मण और अन्य सवर्ण जातियों ने बढ़ चढ़ कर योगदान दिया था।
** अंग्रेजों ने इसका बदला लेने के लिए फूट डालो और राज करो की नीति अपनायी।इतिहास की पुस्तकों में मिलावट कर जातियों के बीच विद्वेष को बढ़ावा दिया।
** अंग्रेजों के एजेंट कांग्रेस के नेहरू, गांधी, जिन्ना ,अम्बेडकर आदि ने दलित,पिछड़े,अल्पसंख्यकों को भारत के संविधान में आरक्षण का विशेषाधिकार दे दिया।
** जहां ये समुदाय संगठित होकर अपने राजनैतिक अधिकारों के लिए जागरूक हुए। वहीँ ब्राह्मण समाज अपनी जातीय श्रेष्ठता के अहंकार में डूबा रहा। असंगठित रहा और धीरे धीरे लोकतंत्र में राजनैतिक वर्चस्व के मामले में ही नहीं बल्कि सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक हर क्षेत्र में एक षड्यंत्र के तहत हाशिये पर धकेल दिया गया है। और वह दिन दूर नहीं जब ब्राह्मण समाज के नौनिहालों के भाग्य में सिवा मजदूरी के और कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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वैसे तो ब्राह्मणों के अनेक संगठन भारत के विभिन्न प्रदेशों में बने हुए हैं। पर वे एक छोटे दायरे में सिमट कर रह गए हैं।
** सब अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग अलाप रहे हैं।
** हमे ध्यान रखना होगा कि लोकतंत्र में संख्या बल प्रधान है। राजनैतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सभी प्रकार के ब्राह्मणों का एक बृहत्तर संगठन राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय बनना चाहिए।
सभी छोटे बड़े संगठन अपने अपने क्षेत्रों में कार्य करें। परंतु राजनैतिक लक्ष्य की पूर्ति के लिए एक साझा मंच बनाएं।
** अखिल विश्व ब्रह्मर्षि समाज इस सब के लिए सभी ब्राह्मण समाज का आह्वान करता है कि आइये हम सब मिलकर अपनी प्राचीन गौरव गरिमा की स्थापना के लिए मिलकर प्रयास करें।
जय परशुराम ।
शेष अगले सन्देश में।

Shri Onkar Nath Sharma - Admin

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