Category Archives: adminwrites

भूमिहार ब्राह्मण उत्तम ब्राह्मण

भूमिहार को ब्राह्मण कहने पर जो आपत्ति करते हैं पढ़ ले अयोध्या जी में पुराना ‘आनन्द भवन’ नामक एक मठ है, जिसकी स्थापना भूमिहार ब्राह्मण कुल में उत्पन्न एक विरक्त महात्मा ने की थी। उस मठ के महंथ ‘सियावर शरण’ अपना उत्तराधिकारी घोषित किए बिना ही साकेतवासी हो गए। अस्तु, उनके भंडारे में उपस्थित संत-महंथों ने

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तुलसी कौन थी

*तुलसी कौन थी?* “`तुलसी(पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी.बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी.जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया।

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चमार शब्द की उत्पत्ती

चमार शब्द की उत्पत्ती कैसे हुई। सिकन्दर लोदी (1489-1517) के शासनकाल से पहले पूरे भारतीय इतिहास में ‘चमार’ नाम की किसी जाति का उल्लेख नहीं मिलता | आज जिन्हें हम चमार जाति से संबोधित करते हैं और जिनके साथ छूआछूत का व्यवहार करते हैं, दरअसल वह वीर चंवर वंश के क्षत्रिय हैं | जिन्हें सिकन्दर

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Shakti Pith Chamunda Devi

सरकार व प्रशासनिक उदासीनता के चलते शक्तिपीठ चामुंडा को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित करने के लिए नजरअंदाज किया जा रहा है

सरकार व प्रशासनिक उदासीनता के चलते शक्तिपीठ चामुंडा को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित करने के लिए नजरअंदाज किया जा रहा है-अखिल भारतीय रास्ट्रवादी किसान संगठन एक तरफ जहां सरकार पर्यटकों को लुभाने व राजस्व कमाने के लिए पर्यटक स्थलों को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं बनाकर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है।

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ब्रह्मर्षि समाज

रूद्रमहालय’ मंदीर अयाचक ब्रह्मणों की पहचान और शानका प्रतिक हैं, रूद्रदेव या महादेव अयाचक ब्राह्मणों का ईष्ठदेवता हैं । सहस्र औदिच्य ब्राह्मण (अयाचक ब्राह्मण/ब्रह्मर्षि समाज ) अधिकांशतय: गुजरात राज्य में निवास करते हें| सहस्र औदिच्य ब्राह्मण के रूप में मूल इतिहास वर्ष 950 ई. के आसपास से पाया जाता हे| मूलराज सोलंकी ने 1037 ब्राह्मण

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Shri Onkar Nath Sharma - Admin

कलियुग में संघ शक्ति ही प्रधान है

संघे शक्ति कलियुगे ! अर्थात कलियुग में संघ शक्ति ही प्रधान है। ************************************ ब्राह्मण को भूसुर, पुरोहित,पंडित, ब्रह्मर्षि आदि नामोँ से जाना जाता है ******************************** इस पृथ्वी पर सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य हैं और मनुष्यों में भी सर्वश्रेष्ठ अवस्था ब्राह्मण की है। प्राचीन काल में बड़े बड़े राजा ब्राह्मणों के सामने मस्तक नवाते थे, ब्राह्मण के

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याचक एवं अयाचक ब्राह्मण

आर्यों की श्रुति, स्मृति, पुरणादि, संस्कृत ग्रन्थों के अनुसार सृष्टि के आरंभ में सर्व प्रथम ब्रह्मा उत्पन्न हुए। उनके द्वारा जो प्रथम प्रजा उत्पन्न हुई वह ब्राह्मण कही गई। इसके पश्चात जैसे जैसे मनुष्यों की आबादी बढ़ती गई, उनके गुण ओर कर्म के अनुसार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, और शूद्र ये चार जाती भेद, या वर्ण

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Kamlendra Priyadarshi - Admin

गर्व से कहो कि तुम हिंदू हो

किसी भी देश की उन्नति उस देश में रहने वाले उस समुदाय से होती है,जो कि उस देश की धरती को अपनी मात्र भूमि, पितृ भूमि व पुज्य्भूमि मानता है। भारत एक धर्मनिरपेक्स देश है। परन्तु देखिये की कश्मीर व नागालैंड में आप लोग जमीन नही खरीद सकते, केवल मात्र इसलिए की वो प्रदेश मुस्लिम

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Kamlendra Priyadarshi - Admin

बिहार की दुर्गति

पिछले कुछ दशकों में बिहार की ऐसी दुर्गति हुई कि बिहार एक अपशब्द बन गया हुआ है । कुशासन, जातिवाद, भ्रष्टाचार आदि को ही बढ़ावा मिला , आज विकास की बातें गौण हो गयी है लालू-नितीश केवल कुर्सी का भूखा है अमन चैन से कुछ भी लेना देना नहीं है.| बिहार का भविष्य एक नये

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