बिहार की दुर्गति

पिछले कुछ दशकों में बिहार की ऐसी दुर्गति हुई कि बिहार एक अपशब्द बन गया हुआ है । कुशासन, जातिवाद, भ्रष्टाचार आदि को ही बढ़ावा मिला , आज विकास की बातें गौण हो गयी है लालू-नितीश केवल कुर्सी का भूखा है अमन चैन से कुछ भी लेना देना नहीं है.| बिहार का भविष्य एक नये अंधकार की ओर अवश्य ले जा रहे है ।

आज की तारीख में भी बिहार की जनता बिहार से अधिक अन्य राज्यों में रोजगार तलाशती है, जिसका उदाहरणbiharstatus है, बिहार से भारत के किसी भी कोने में जाने वाली ट्रेनों में बिहारियों की भीड़ । जिस विकास की दर का दावा यहां की सरकार कर रही है, वह केवल दस्तावेजों में ग्राफों तक ही, तथा मंत्रियों के लाइफस्टाइल पर ही झलक रही है, न की आज जनता को नये रोजगार मिल रहे हैं । रोजगार के विकास के बारे में बात करें तो वहां के लोगों को न तो कोई आश्‍वासन ही मिला है, न ही वहां कोई औद्यौगिक विकास ही हुआ है, जिसके लिए उन्हें, कभी शिवसेना से मार खानी पड़ती है, तो कभी असम में रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा में असमियों द्वारा प्रताड़ना भी सहनी पड़ती है, जवाब में सरकार कभी शिवसेना को तो कभी असम सरकार को जिम्मेदार ठहराती है ।

——By Mr. Kamlendra Priyadarshi

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