सरकार व प्रशासनिक उदासीनता के चलते शक्तिपीठ चामुंडा को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित करने के लिए नजरअंदाज किया जा रहा है

सरकार व प्रशासनिक उदासीनता के चलते शक्तिपीठ चामुंडा को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित करने के लिए नजरअंदाज किया जा रहा है-अखिल भारतीय रास्ट्रवादी किसान संगठन

एक तरफ जहां सरकार पर्यटकों को लुभाने व राजस्व कमाने के लिए पर्यटक स्थलों को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं बनाकर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। वहीं मुजफ्फरपुर जिले में पर्यटन के प्राकृतिक स्रोत व संभावना होने के बाद भी यह इलाका प्रशासन की अनदेखी का शिकार होता जा रहा है। जबकि पर्यटन स्थलों के बढ़ावे से राजस्व तो बढेगा ही साथ ही लोगों के लिए रोजगार के दरवाजे भी खुल जाएंगे। रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सकते हैं। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते शक्तिपीठ चामुंडा को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित करने के लिए नजरअंदाज किया जा रहा है।

Shakti Pith Chamunda Devi

Shakti Pith Chamunda Devi

शक्तिपीठ चामुंडा कटरा-धनौर ग्राम की कुल देवी हैं। यहाँ के लोगों का कोई भी शुभ-कर्म, पुण्य-कर्म, संस्कार-कर्म, जगदम्बा पूजन के बिना पूर्ण नहीं होता है। धनौर ग्राम में ही बागमती के किनारे धनेशंवरनाथ (श्री शंकर जी) का भी विशाल शिवलिंग धरती से निकला है। यहाँ शिवलिंग का जलाभिषेक करने वालों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

सांस्कृतिक दृष्टि से बोधगया की तरह कटरा गढ़ (देव भूमि कटरा-धनौर गांव मुजफ्फरपुर) भी एक बहुत महत्वपूर्ण आस्था व विश्वास का केन्द्र में शीर्ष है। प्राचीन काल से सनातन और हिन्दू सभ्यताओं के इतिहास को समेटे है। प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में देव भूमि कटरा-धनौर गांव में स्थित शक्ति पीठ माँ चामुंडा मंदिर को देखने, पूजा-अर्चना करने हिन्दू धर्मावलंबी आते हैं। लोक मान्यताओ के अनुसार राजा जनक के भाई कुशध्वज की राजधानी कटरा गढ़ थी त था उनकी कुलदेवी माँ चामुंडा है | पौराणिक मान्यता है कि सती के मृत शरीर को लेकर जब शिव ने तांडव किया था तब देवी सती का एक नयन यहाँ गिरा था । कहा जाता है कि राम, माँ सीता ने देवी की पूजा की थी। मां दुर्गा के द्वारा चण्ड-मुण्डक वध इस स्थान पर हुआ इस स्थल का वर्णन विभन्न रामायणों व वृहत विष्णुपुराण में मिलता है। .

कटरा गढ़ से लगभल 10 किलोमीटर की दूरी पर भरवस्थान स्थित है। भरवस्थान स्थित बाबा आनंद भरव मंदिर (कटरा-औराई) बाबा आनंद जन-जन के महानायक है, सावन के महीने में यहाँ शिवलिंग का जलाभिषेक करने वालों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

By

Kamlendra Priyadarshi

Leave A Reply